Friday, July 31, 2020

“अमीर दिल से बनो चीजों से नहीं”

एक अमीर ने एक फकीर से पूछा कि दुनिया में महान कौन है?


 फकीर ने जवाब दिया- "महान वह है, जो न तो अपने (खुद )को देखता है, न तो अपने को पहचानता है। और दुनिया के आगे अपने को भी भूल जाता है।"


 अमीर ने फकीर से फिर कहा- "तुम्हारी बात मेरी समझ मैं नहीं आई। मुझे समझा कर फिर से  कहो।"

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 फकीर हँसा और उसने अपना उदाहरण दिया। उसने कहा- "तुम्हें नहीं मालूम कि मैं यहा बैठे लोगों के सामने हाथ क्यों फैलाता हूं? "

 "मैं नहीं जानता।'

"लोग समझते हैं। कि मैं भगवान का नाम लेकर दूसरों  से भीख मांगता हूं। वह भी अपने पेट के लिए, मगर ऐसा नहीं है।"

 "तो फिर?"

" मैं भले और बुरे की परख करता हूं। मुझे दुनिया के मालिक के दरबार में जाना है। मैं भी परिश्रम करता हूं, जब संसार का स्वामी  पूछेगा तो उसे बताऊंगा कि मैं सब को दुआ देता था, यह कहता था। की दुनिया पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। अच्छे और बुरे दोनों का भला हो, इसीलिए तो कहता हूं कि जो दे,उसका भी भला और जो न  दे, उसका भी भला। मैं हर बंदे को इसलिए दुआ देता हूं कि  वह नेक राह पर चलें, नेक काम करें ,और नेकी कर के कुएं में डाल दे।"

 आमिर की आंखें खुल गई। उसने फौरन ही फकीर से दूसरा सवाल कर दिया। वह बोला -"मैं महान बनना चाहता हूं ,इसके लिए बताइए कि मैं क्या करूं?"

 फकीर " तुम सोचते हो, इसलिए तुम महान कभी नहीं बन सकते हो।"

 अमीर" तो क्या करूं?"

 फकीर "अपने को भूल जाओ"

 अमीर" किस को याद करु?"

 फकीर "नेकी और नेक काम करो।"

 अमीर" नेकी में रोज करता हूं"

 फकीर" कैसे?"

 अमीर" मैं लोगों को दान देता हूं।"

फकीर "और यह सोच कर देते हो कि  उससे तुम्हारा भला

 होगा ?

अमीर "हां।"

 फकीर "तुम महान कभी नहीं बन सकते और तुम्हारा भला कभी नहीं हो सकता।"

 अमीर "तब मैं क्या करूं?"

 फकीर "अपने को भूल जाओ। दूसरों को देखो। दूसरों की सुनो ।दूसरों के काम  आओ। जिसकी जो जरूरत हो, उस जरूरत को पूरा करो। मेहनत करो। यदि तुम संसार के लिए परिश्रम करोगे, तो तुम्हारा परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।"

 फिर उसके बात क्या था?

 वह अमीर फिर वहां नहीं रुका। उसने पीछे घूम कर भी नहीं देखा। उसने सीधी घर की रहा ली।

 तब उसका अंतःकरण कह रहा था की महान सोचने से आदमी कभी महान नहीं बन पाता। उसके कर्म ही उसे महान बनाते हैं। मैं ऐसा परिश्रम और ऐसी रहा अपनाऊं, जो मेरे लिए न होकर दूसरों के लिए हो।



Source: “Haste haste jina sikho”


Tuesday, July 28, 2020

“एक राजा ऐसा भी”

उपकारी की संपत्ति कुछ भी नहीं होती। वह जितना इकट्ठा करता है। उससे कहीं अधिक लूटा देता है। यही कारण है कि उसके दोनों हाथ हमेशा खाली रहते हैं, मगर वह खुश रहता है। उसे न तो कोई चिंता होती है; और न  कोई व्याधि सताती है, वह सदैव खुश रहता है। सपने में भी वह अपनी संपत्ति  लुटाता है। वह हंसकर सोता और हंसकर जागता है, इसीलिए वह व्यक्ति महान है।


ईरान के सुल्तान हारून रशीद की बेगम का हाथ जल गया ।सुल्तान ने उसका इलाज नहीं  करवाया, जब उससे पूछा गया कि वह इलाज क्यों नहीं करवाता है । तो उसने जवाब दिया कि मेरे पास दौलत नहीं है। इस बात पर  लोग चौक गए और पूछा तो सुल्तान ने बताया। कि खजाने में जो धन है । वह प्रजा का है, मेरा नहीं। उस पर मेरा कोई अधिकार नहीं है, मैं केवल उसका  रक्षक हूं ।मैं कुरान शरीफ की प्रतिज्ञा  लेता हूं।उसकी बिक्री से जो आमदनी होती है उसी से अपनी जरूरतें पूरी करता हूं।

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  • आज वह महान  है इसीलिए इतिहास के पन्नों में उसका नाम सोने के अक्षरों में लिखा गया है। उसका जीवन अपने लिए नहीं दूसरों के लिए था। वह जिंदा रहने के लिए परिश्रम  नहीं करता था। परिश्रम केवल इसलिए करता था कि वह राज्य और प्रजा दोनों की रक्षा करने में किसी तरह सफल हो सके।   

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Sunday, July 26, 2020

"कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती"


 

 कई बार ऐसा भी होता है की लगातार असफलता मिलने के बाद भी आदमी निराश नहीं होता वह कहता है कि मैं मृत्यु तक परिश्रम करता रहूंगा।


 एक राजा युद्ध में हार गया उसकी पराजय बहुत बुरी तरह से हुई थी। दुश्मन के सिपाही उसका पीछा कर रहे  थे। इसी तरह वह बच बचाकर पहाड़ की एक गुफा में छिप गया।

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 जब दुश्मन के सिपाही चले गए तब भी उसका डर कम नहीं हुआ  वह यही सोचता रहा कि कहीं ऐसा ना  हो कि मैं गुफा से बाहर निकलूँ और शत्रु के सिपाही मुझे पकड़ ले। वह 2 दिन तक भूखा और प्यासा उसी गुफा में पढ़ा रहा।


 तीसरे दिन जब सवेरा हुआ और सूरज की किरणें उस गुफा के अंदर आई तो उसने देखा कि एक चींटी  घास के सूखे बीज नीचे से ऊपर लिए जा रही है वह  बीज बार-बार नीचे गिर रहा था, और चींटी भी बार-बार उतर रही थी और उठा कर ऊपर लिए जा रही थी।

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इस तरह वह 7 बार बीज नीचे गिरता है और आठवीं बार चढ़ने में सफल हो जाती है|

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 यह देख कर राजा उठ कर बैठ गया। उसका चेहरा प्रसन्नता  से खिल उठा। उसने मन ही मन सोचा कि जब इस तरह  एक छोटी सी चींटी ने हिम्मत नहीं हारी तो मैं हिम्मत कैसे हार जाऊं ! मैं दुश्मन से बदला लूंगा। मैं बार-बार तैयारी करूंगा और शत्रु पर चढ़ाई करूंगा और अंत मैं जीत कर  रहूंगा।

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राजा गुफा से बाहर निकला और उसने चींटी का अनुकरण किया अंत में उसे सफलता मिली और उसने अपना राज्य वापिस जीत लिया।

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Source: “Haste haste jina sikho”


Thursday, July 23, 2020

"अहंकार की हार"


एक थी सड़क और दूसरा था सुखा पेड़ उसी के पास पड़ा हुआ था एक बड़ा-सा पत्थर सड़क ने पत्थर का उपहास किया। उसका कहना था कि मैं बहुत ही खुशनसीब हूं। मेरी छाती पर दिन-रात, पशु ,मनुष्य और सवारियां चलती है मैं सब का बोझ उठाती हूं फिर भी मुस्कुराती रहती हूं, यह पत्थर बेकार है उसका कोई उपयोग नहीं है अंधेरे में लोग ठोकर खाकर गिर पड़ते हैं। उनका खून बहता है। पत्थर खूनी है।

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 इस पर सूखे पेड़ ने समझाया कि पत्थर की हंसी मत उड़ाओ। इस संसार में कोई भी ऐसी वस्तु नहीं है जिसका उपयोग न हो। पत्थर के न जाने कितने उपयोग हैं। यह पत्थर भी उपयोगी है और इसका उपयोग कभी न कभी जरूर होगा।

 इस पर सड़क जोर से हंसी और हंसते-हंसते पेड़ से कहने लगी “जैसे को तैसा ही मिलता है, जैसा यह पत्थर है वैसे ही तुम। और तुम दोनों का कोई उपयोग नहीं है तुम दोनों व्यर्थ हो।” 

 अब पत्थर को बोलना पड़ गया। उसने सड़क से कहा - जब तेरे घाव हो जाते हैं, तेरी छाती फूट जाती है, तो मेरे ही टुकड़े किए जाते हैं और तेरे जख्म भरे जाते हैं इतराती क्यों है। सड़क?

अच्छा और बुरा समय सब पर आता है। सड़क ने पत्थर की हंसी उड़ाई। पत्थर चुप नहीं रहा|  उसका कहना था कि आने वाला समय बताएगा कि मेरा उपयोग है कि नहीं?


 कुछ दिन बाद बरसात का मौसम आ गया। लगातार मूसलाधार बरसात हुई सड़क टूट गई उसमें खूब गहरी और चौड़ी दरारे पड़ गई।

जब वह बड़ा-सा पत्थर तोड़ा गया। उसका छोटा चौथाई अंश सड़क के काम आया। उसकी दरार भर गई, सड़क का गर्व चूर-चूर हो गया।


बरसात में सूखे पेड़ में भी हरे पत्ते निकल आए वह भी जवान हो गया सड़क को मुंह की खानी पड़ी उसने यह स्वीकार किया कि वास्तव में दुनिया में कोई भी चीज बेकार नहीं है। बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए बड़े बोल बोलने वाले का सिर नीचा होता है।




Sunday, July 19, 2020

प्रकृति का खजाना हंसना और गुनगुनाना



जब पतीले से निकलती हुई भाप के साथ लडकियों की मधुर स्वर - लहरी भी सुनाई दे अथवा झाड़ू किसी सुरताल के समान चलने लगे तो समझ लीजिए कि पतीले में जो भी पकेगा, वह निश्चित की स्वादिष्ट होगा। और जिस स्थान पर झाड़ू लगेगा वह स्थान चमचमा उठेगा। यदि काम करते-करते कोई लड़की गाने - गुनगुनाने लगे तो उसके माता-पिता के चेहरे गीत  के उन बोलों  को सुनकर खिल उठते हैं, और भाई-बहन भले ही गीत के उन बोलों  का अर्थ ना समझ पाए, लेकिन प्रसंता पूर्वक काम करने की आदत तो उनमें भी आ जाती है।


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उदाहरण:- 

स्विटज़रलैंड मैं ऐसे गाने वाले ग्वाले हैं जो दूध निकालने के साथ-साथ गाते भी रहते हैं l वह अच्छे गाने वाले ग्वाले या ग्वालिन को मजदूरी भी अधिक मिलती है, क्योंकि गाने के प्रभाव से गाय अधिक दूध देती है।

          

           

 “संगीत की मधुर - लहरी भेड़ों को पुष्ट और बलवान बनाती है और जब गडरिया भेड़े चराते हुए गीत गाने लगते हैं तो उनकी थकान दूर हो जाती है।”

  

कुछ लोग जीवन पथ पर इस प्रकार चलते हैं मानो गली में बैंड बजता जा रहा हो, जो हर और हवा में संगीत की लहरें बिखेर रहा हो, जो भी ऐसे संगीत को सुनता है वह आनंद  विभोर हो जाता है। लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं, जो अपनी आवाजों से वातावरण को बोझिल बना देते हैं। ऐसे लोगों का व्यवहार तथा उनकी आवाज डरावनी प्रतीत होती है कुछ लोगों की आवाज में मधुरता होती है, मानो किसी बात से पके हुए फूलों की सुगंध आ रही हो। ऐसे लोग जहां कहीं भी जाते हैं। वातावरण में संगीतमय मधुरिमा बिखर जाती है। ऐसे व्यक्तियों को हर कोई अपने पास बिठाना चाहता है, उनसे बातचीत करना चाहता है। जिस प्रकार सूर्य की धूप वनस्पतियों के लिए लाभप्रद है उसी प्रकार हंसी शरीर के लिए भी लाभप्रद है


आपको स्वयं गाना नहीं आता तो कोई बात नहीं लेकिन यदि आपके मन में संगीत के प्रति थोड़ी - सी भी संवेदना है तो समझ लीजिए वह आपके  आनन्द का स्त्रोत है।






SOURCE : “हसते हसते जीना सी खो



Monday, July 13, 2020

“जीवन के उतार चढ़ाव में दृष्टिकोण का महत्व”

 

जीवन में कई उतार- चढ़ाव आते रहते है, और उन परिस्थितियों में आपका क्या नज़रिया रहता है “इसलिए कहा जाता है की जिंदगी जब इम्तिहान लेती तो कोई बिखर जाता है कोई निखर जाता हैI” यदि कष्ट को हंसते-हंसते सहन  किया जाए तो वह सुखद हो जाता है। पर यह तभी हो सकता है जब काम को महान बना दिया जाए।


उदाहरण :-  बोल्ट नामक व्यक्ति 41 वर्ष की आयु मैं करोड़पति हो चुका था और 52 वर्ष की आयु में उनके पास   कानी कोड़ी भी नहीं रह गई थी इतने पर भी उसने साहस नहीं छोड़ा वह फिर  से काम में जुट गया और फिर से उसने विशाल धन-संपत्ति अर्जित की उस समय उसे 3000 लोगों का कर्ज चुकाना था लेकिन उसने सबका पूरा कर्ज चुकाया और अपनी प्रतिज्ञा पूरी की

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एक बार किसी ने बोल्ट महोदय से पूछा तुमने इतनी विशाल धन-संपत्ति पुनः कैसे प्राप्त कर ली? उत्तर में बोल्ट महोदय ने कहा यह तो बड़ी मामूली सी बात है मैंने अपने स्वभाव की मधुरता को कभी भी समाप्त नहीं होने दिया और सदा आशावादी बना रहा कभी निराश हुआ ही नहीं मैं सदा यही मानता रहा कि मनुष्य और समय कभी बुरे नहीं होते मेरा तो यह विश्वास है कि इस संसार में अथाह धन संपत्ति भरी पड़ी है आवश्यकता है तो केवल इस बात की कि हम जाए और काम करें तथा धन संपत्ति ले आए। जीवन में मेरी सफलता का रहस्य केवल इतना है कि मैंने सदा जीवन के उजले पक्ष पर ही दृष्टि रखी।


 


Thursday, July 9, 2020

जीवन में धूप का महत्व (The importance of sunshine in life)


वाल्ट हिटमैन ने एक स्थान पर लिखा है की 12 वर्ष पूर्व में कामडेन  नामक जगह पर मृत्यु की इच्छा लेकर आया था। किंतु प्रतिदिन ज्यो-ज्यो  में गांव की ओर  जाता और खुली धूप का सेवन करता, त्यों- त्यों मेरा स्वास्थ्य सुधरता गया।प्रकृति ने मुझे मेरा स्वास्थ्य वापस लौटा दिया। 

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 फ्लोरेंस नाइटिंगेल का कथन-

रोगियों के विषय में मेरा अनुभव का सुनिश्चित परिणाम यही है कि स्वच्छ वायु के अतिरिक्त कोई अन्य वस्तु उनके लिए सर्वाधिक उपयोगी और हितकारी है तो वह है- धूप । कोई वस्तु सर्वाधिक अहितकारी है तो वह है अंधकार।

केवल प्रकाश ही नहीं अपितु धूप भी रोगियों के लिए परम आवश्यक होती है।

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डॉक्टर कॉट्स ने कहा है – “वायु को शुद्ध रखने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। जिस प्रकार अंधकार में कोई पौधा बढ़ नहीं सकता उसी प्रकार मनुष्य भी अंधकार में स्वस्थ नहीं रह सकता”


उदाहरण - अमेरिका में जब अंधों का पहला आश्रम बनाया गया तो कंजूसी में आकर आयोजकों ने निश्चय किया कि उनके कमरों में खिड़कियां ना रखी जाए। उनका तर्क यह था कि अंधे  लोग देख तो  सकते नहीं, है। फिर खिड़की की क्या आवश्यकता है ?


इस प्रकार खिड़कियां नहीं बनाई गई,किंतु वायु के आवागमन की व्यवस्था कर दी थी। उन में उन अंधों को रखा गया किंतु वह वहां रह नहीं सके। वह एक-एक करके बीमार पड़ने लगे। उनको  बेचैनी होती थी, किसी वस्तु की ललक होती थी किंतु वह समझ नहीं पाते थे कि उनको क्या चाहिए।

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 इस प्रकार उनमें से दो की मृत्यु हो गई और शेष बीमार हो गए। तब समिति को होश आया और उन्होंने उन कमरों में खिड़कियां बनवाई। सूर्य का प्रकाश आते ही रोगियों के चेहरे खिलने लगे धीरे-धीरे उनके चेहरों पर लालिमा आती गई और उनका स्वास्थ्य भी ठीक होता गया।

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               इस प्रकार हम देखते हैं कि धूप का जीवन में कितना अधिक महत्व है इतना ही महत्व जीवन में  
              हंसी का है मुस्कान का है। सेहत के लिए मुस्कान धूप का कार्य करती है।


The importance of sunshine in life 

written by Walt Hitman at a place that 12 years ago brought a wish of death to a place called Kamden. But everyday I used to go towards the village in the light and enjoy the open sun, as my health improved. Nature returned my health to me. 


 Florence Nightingale's statement about

patients is the sure result of my experience that anything other than clean air is most useful and beneficial for them - sunshine. If something is most harmful, then it is darkness.

 Not only light, but also sunlight is absolutely essential for patients.


Doctor Coats has said - "Trees have an important contribution in keeping the air pure. Just as no plant can grow in darkness, so also humans cannot remain healthy in darkness.


 Example - When the first ashram of the blind was built in America, the organizers decided to keep windows in their rooms. His argument was that blind people cannot see. Then what is the need of a window?

In this way the windows were not made, but arranged for the movement of air. Those blinds were kept in him but he could not live there. He started falling ill one by one. He used to get restless, craving for something but he could not understand what he needed.


 Thus two of them died and the rest became ill. Then the committee became aware and they made windows in those rooms. As soon as the sunlight came, the faces of the patients started blossoming and gradually there was redness on their faces and their health also started recovering.

               In this way, we see how much importance of sunlight is in life, the same
                          importance of in life laughter of smile. Smile acts like sunshine for health.


source- Haste haste jina sikho by Swett Marden

Tuesday, July 7, 2020

जीत विचारों की (Winning ideas)


भाग्य अथवा अवसर की बात जो भी व्यक्ति करता है वह निश्चित रूप से अभागा व आलसी होता है, प्रतिभावान व्यक्ति तो सदा सौभाग्यशाली होता है


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Anyone who talks about luck or opportunity is definitely unfortunate and lazy. Talented person is always lucky.

 

विचार जीवन का महत्वपूर्ण अवयव है हमारी सफलता असफलता की बुनियाद हमारे विचारों पर ही रखी जाती है और संसार भी विचारों से ही प्रभावित होता है

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Thoughts are an important component of life, the foundation of our success and failure is laid on our thoughts and the world is also influenced by thoughts.


भागो मत जागो (know yourself)

जो जाग गया वहां समझ गया कि मैं इस संसार में कुछ करने आया हूं  जो जागा नहीं उसने अपने जन्म के उद्देश्य को नहीं समझा और कीट पतंगों की भांति  जी कर चला गया

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Whoever woke up, understood that I had come to do something in this world that was not awake, he did not understand the purpose of his birth and went on living like insect kites.

 

लोग  उगते सूरज को सलाम करते हैं डूबते सूरज को कोई सलाम नहीं करता और ना ही कोई यहां जानने की चेष्टा करता है कि सूरज क्यों डूबा

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People salute the rising sun, no one salutes the setting sun nor does anyone try to know why the sun has sunk.


Sunday, July 5, 2020

"यह वह है जिसकी हमें जरूरत है" This is what we need

यह मंत्र पढ़ने के बाद  आपको लगेगा कि शब्दों के जोड़ (Combination) से एक अलग ही रचना बनी है, "यह वह है"  किसी और इंसान के लिए इन शब्दों का कोई महत्व नहीं है इसके साथ जीवन का महत्वपूर्ण नियम जुड़ा हुआ है जब आप इस मंत्र को पूरी तरह समझेंगे तब आप कहेंगे वाकई यहां कितना बड़ा सत्य है 


इस बात का उदाहरण द्वारा समझे एक फकीर संत अपने शिष्यों के साथ एक गांव से गुजर रहे थे

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उनके शिष्यों ने संत से कहा अब बहुत देर हो गई है दूसरे गांव में पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो जाएगा हमें यही रुकना चाहिए, इस पर उस संत ने अपने शिष्यों से कहा नहीं हम आगे चलेंगे शिष्य कुछ बोल नहीं पाए और सभी आगे एक गांव में पहुंचे उस गांव में अलग-अलग संप्रदाय के लोग ज्यादा मात्रा में रहते थे I
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उन लोगों  ने शिष्यों को खाने और रहने की जगह नहीं दी उस वक्त  सभी शिष्य नाराज हो गए उन्होंने संत से कहा हमने तो पहले ही आपसे कहा था की हम रास्ते में रुक जाते हैं हमें इस गांव मैं नहीं आना चाहिए था I अब हम इतनी रात में कहां जाएंगे इस बात पर उस संत ने शिष्यों से कहा जल्दी अनुमान मत लगाओ जो भी चल रहा है उसे देखो
शिष्यों को अपने गुरु की बात पसंद नहीं आई यदि उन्हें यह मंत्र पता  होता तो वे यही कहते "यह वह हैं जिसकी हमें जरूरत है" मगर उन्हें यह मंत्र पता नहीं था इसलिए वह यह नहीं बोल पाए और परेशान रहे उस गांव से बाहर निकलने के बाद संत और  उनके शिष्य रात गुजारने के लिए गांव के बाहर एक खंडहर में पहुंचे
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उस खंडहर की  की आधी छत टूटी हुई थी सभी परेशानी में वहां सो गए वह रात पूर्णिमा की रात थी I यानी उस रात पूरा चांद निकला  था
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आधी  रात के बाद जब उस संत की आंखें खुली तो उसने आकाश का नया मनोरम दृश्य देखा उन्होंने अपने शिष्यों को उठाकर कहा उठो आकाश का यहां अद्भुत दृश्य देखो उन शिष्यों ने जब वह मनोरम दृश्य देखा तब उनके अंदर भी आनंद और समाधि का अनुभव जागा वे घंटों उस अनुभव में रहे। सुबह उठकर उन्हें अपनी मूर्खता का एहसास हुआ। उन सभी को यहां से महसूस हुआ कि अगर वे वहां नहीं आते तो वह इस आनंद और समाधि के अनुभव से वंचित रह जाते उन शिष्यों ने तब यहां बात मानी की  This is what we need "यह वह है जिसकी हमें जरूरत है" हर घटना जो इस क्षण हो रही है वह हमारी जरूरत है| 


 उस संत ने भले ही अपने शिष्यों को जीवन का अर्थ  यहां नियम समझाने के लिए अलग शब्द कहे हो मगर अर्थ यही था। आपने कहानी से यही समझा कि "यह वह है जिसकी मुझे जरूरत है" आपके साथ भी कई बार ऐसा होता है कि जब घटना चल रही होती है तब आपको लगता है कि यह कितना गलत चल रहा है मुझे इस बात की जरूरत नहीं है उन शिष्यों को भी ऐसा ही लगा कि उन्हें गांव से निकालने की जरूरत नहीं थी मगर जब आगे का दृश्य सामने आया तब उन्हें पता चला की हकीकत में किस चीज की तैयारी करवाई जा रही थी कौन सा अनुभव देना था आगे का दृश्य क्या था जिस वजह से सुंदर वर्तमान निर्माण हुआ जो इंसान उच्च दृष्टिकोण यानी हेलीकॉप्टर के नजरिए से देख रहा है वह समझ पाता है कि "यह वह है जिसकी मुझे जरूरत है"



SOURCE : स्वीकार का जादू “सरश्री” 


Friday, July 3, 2020

“स्वीकार की शक्ति” (POWER OF ACCEPTANCE)

 

हर इंसान असली खुशी की तलाश में भटक रहा है । असली खुशी न पाकर वहां उसे धन – दोलत, मान –सम्मान,  पद – प्रतिष्ठा, नाम – शोहरत, सुख - सुविधा मैं ढूंढता रहता है। तो क्या खुशी ऊपर दी गई बातों से ही मिल सकती है ? क्या खुशी चीजों को छुपा कर रखने से मिल सकती है ? नहीं असली खुशी मन के पास इच्छाओं के पीछे इंसान की पूर्व अवस्था में छिपी हुई है। उस अवस्था तक पहुंचने का सूत्र स्वीकार भाव से शुरू होता  है।

 

 कहानी का किरदार - वह  अमीर इंसान यह बातें नहीं जानता था | इसलिए जब एक दिन उसकी सारी दौलत चोरी हो गई तब वह दुखी होकर रोने लगा। उस अमीर इंसान को रोते देख एक समझदार इंसान, जो वहां से गुजर रहा था | वह आया और उस अमीर इंसान से पूछा , ‘ तुम क्यों रो रहे हो ?  अमीर इंसान ने  उसे बताया की, मेरी सारी दौलत चोरी हो गई है |इसलिए मैं रो रहा हूं|  मैं रोज यहां आता था और अपनी दौलत को देखकर खुश होता था | अब मेरी खुशी लुट गई है, अब मैं कभी खुशी प्राप्त नहीं कर पाऊंगा| ’ यह सारी बातें सुनकर समझदार व्यक्ति ने अमीर इंसान खुशी का उपाय  बताया।

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 समझदार इंसान ने अमीर इंसान से कहा , ‘सबसे पहले चोरी की इस घटना को स्वीकार करो और कहो कि इस चोरी के बावजूद भी में खुश रह सकता हूं ।’ अमीर इंसान ने स्वीकार की बात को बिल्कुल अस्वीकार किया| अमीर इंसान के अस्वीकार को देखकर समझदार इंसान ने उसे यू समझाया,

 

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‘तुम अपनी दौलत को इस्तेमाल नहीं कर रहे थे सिर्फ रोज उसे देख कर खुश होते थे। अब भी रोज तुम्हें ऐसा ही करना है, रोज यहां आकर, गड्ढे को खोदकर, दौलत का थैला देख कर खुश होते रहना है।’ अमीर इंसान की समझ से यह सारी बातें बाहर थी। समझदार इंसान ने उससे आगे कहा, तुम यह समझ लो की पैसा अब भी थैले में हैं पैसे  तो तुम इस्तेमाल करने वाले नहीं थे।

 

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 जैसे एक गंजा इंसान कंघी का इस्तेमाल नहीं करता तो इसका अर्थ यह है कि वह कंघी को सिर्फ देख सकता है,  उसका इस्तेमाल नहीं कर सकता| ठीक वैसे ही तुम अपनी दौलत का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे तो अब उसके चोरी होने पर तुम्हें रोने की आवश्यकता नहीं है| हर रोज की तरह तुम गढ्डे के स्धान को आकर देखना और यह समझ कर खुश हो ना कि उसमें अब भी तुम्हारी दौलत है।

 

समझदार इंसान की तर्क असंगत बातें सुनकर वह अमीर  इंसान चौक गया| काफी देर चिंतन करने के बाद उससे उस समझदार इंसान की बातें समझ में आने लगी|  जो चीज हम इस्तेमाल करते हैं,  उसी का महत्व हमारे जीवन में होना चाहिए। जो महत्वपूर्ण चीजें हमारे पास नहीं है,  उन्हें प्राप्त करने का प्रयास हमें करना चाहिए।

 

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           कुछ आवश्यकता की चीजें हमें यदि ना मिल पाए तो इस बात को स्वीकार करना चाहिए। मन कहेगा, ‘यह आसान नहीं है’ लेकिन स्वीकार के जादू से,  जो इसमें आपको मिलने वाला है,  जो आप ही इस स्टोरी में पैदा करने वाले हैं, संभव है|  अमीर इंसान की कहानी में आगे क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं है लेकिन आप की कहानी में आगे जो होने वाला है उसका चुनाव आपको करना है। आप स्वीकार के जादू से खुशी का खजाना पाएंगे या अस्वीकार के श्राप से अपने जीवन में शिकायतें ही करते रह जाएंगे,  यह फैसला करना अब आपके हाथ में है।

 

     स्वीकार का जादू-  तुरंत खुशी कैसे पाएं , सही चुनाव को जीतने में आपको मदद करेगी।


SOURCE : स्वीकार का जादू “सरश्री”


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