Saturday, May 29, 2021

जैसे को तैसा – जो जस करई सो तस फल चाखा।


 एक बार भैंस और घोडे में लडाई हो गयी. दोनो एक ही जंगल में रहते थे और पासपास चरते थे. एक ही रास्ते से जाकर एक ही झरने का पानी पीते थे. एक दिन दोनो में लडाई हो गई भैंस ने सिंग मारकर घोडे को घायल कर दिया.  घोडे ने जब देख लिया की वह भैंस से जीत नहीं सकता, तब वह वहां से भाग गया. वह मनुष्य के पास पहूंचा घोडे ने उससे अपनी सहायता करने की प्रार्थना की. मनुष्य ने कहा- भैंस के बडे-बडे सिंग हैं, वह बहुत बलवान हैं मैं उससे कैंसे जीत सकूंगा ?

घोडे ने समझाया कि तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ, एक मोटा डंडा ले लो मैं जल्दी-जल्दी दौडता रहूंगा तुम डंडे मार-मार कर भैंस को घायल कर देना और फिर रस्सी से बांध लेना. मनुष्य ने कहा- मैं उसे बांध कर क्या करूंगा ?  घोडे ने बताया भैंस बडा मीठा दुध देती हैं, तुम उसे पी लिया करना. मनुष्य ने घोडे की बात मान ली. मनुष्य घोडे की पीठ पर बैठकर चल पडा और भैंसे को पीटने लगा.


  बेचारी भैंस जब पीटते-पीटते गिर पडी तब मनुष्य ने उसे बांध लिया। घोडे ने काम समाप्त होने पर कहा अब मुझे छोड दो मैं चरने जाउंगा.  मनुष्य जोर-जोर से हंसने लगा, उसने कहा मैं तुम को भी बांध देता हूं. मैं नहीं जानता था कि तुम सवारी करने का काम आ सकते हो. मैं भैंस का दूध पीयुंगा औंर तुम्हारी पीठ पर बैठकर घुडसवारी करूंगा. 

घोडा बहुत रोया, बहुत पछताया अब क्या हो सकता था. उसने भैंस के साथ जैंसा किया वैंसा फल उसे खुद ही भोगना पडा. जो जस करई सो तस फल चाखा. 



















Thursday, May 27, 2021

दो भाई ओर दैत्य की रोचक कहानी


 किसी नगर में एक सेठ रहता था उसके दो बेटे थे, दोनों ही जवान और निकम्मे थे। सेठ स्वयं खुब मेहनत करता और बेटों से भी काम करने को कहता,  मगर बेटों पर उसकी बातों का कोई असर नही पडता था।  जब सेठ बुढा होकर मरने वाला था,

तो उसने दोनों बेटों को पास बुलाकर कहा- मैं तुम दोनों को व्यापार करने के लिए थोडा-थोडा धन दे रहा हूं इसे लेकर कोई व्यापार शुरू कर दो पर ध्यान रहे, राह में तुम्हें एक दैत्य मिलेगा उससे बचना।  धन देने के लिए सेठ ने जैसे ही तिजोरी खोली, दोनों बेटों की नजर उस पर पडी तिजोरी हीरे, जवारात और सोने चांदी से भरी पडी थी। तिजोरी में इतना माल देखकर दोनों के दिल खिल उठे उन्होंने सोचा इतने धन से तो हम जिंदगीभर बैठे-बैठे खा सकते है। फिर भला हमें व्यापार करने जाने की क्या जरुरत है ? यह सोच दोनों व्यापार करने गये ही नहीं। "greed is bad"  जब पिता की मृत्यु हो गई तो बेटों ने सोचा यदि किसी तरह मैं अपने छोटे भाई का खात्मा कर दूं तो मैं सारी संपत्ति का वारिस बन जाउंगा उधर छोटे भाई के मन में भी ऐसा ही खयाल आया, क्यों न मैं अपने बडे भाई के भोजन में जहर मिला दूं पर जैसे ही वह जहरीला भोजन लेकर बडे भाई के पास पहूंचा वह पहले से ही तैयार बैठा था।  हम मर सकते हैं लेकिन वासना कभी नहीं मरती, छोटे भाई के आते ही वह उस पर टूट पडा और उसका गला दबोचकर मार डाला। छोटे भाई का लाया भोजन किया और पलंग पर लैट गया और बिस्तर पर ही ढेर हो गया। जहरीेले भोजन ने उसका काम तमाम कर दिया था। पिता ने ठीक ही कहा था कि दैत्य से बचना वह दैत्य कोई और न होकर संचित धन के लालच का ही तो था। अपने पिता के संकेत को दोनों बेटों में से कोई न समझ सका और अंत में दोनों को ही अपनी जान गवानी पडीं |  ऐसा नहीं हैं की सिर्फ धन का लालच ही बुरा होता हो, लालच मात्र ही बुरा होता हैं | फिर चाहे वह किसी भी चीज से सम्बंधित क्यों न हो |  और ऐसा नहीं हैं की इस देत्य की मुलाक़ात सिर्फ इन दोनों निकम्मे लड़को से ही हुई हो | इस देत्य की मुलाकात सभी से होती, अगर आपके जीवन में यह देत्य अभी नहीं आया तो चिंता मत करें यह आएगा और आपको इसके आने की खबर भी नहीं लगेगी |

Wednesday, May 26, 2021

बुरे मित्रो की धुर्तता का परिणाम


 किसी जंगल मै एक वृक्ष पर एक कौआ रहता था. संयोग से एक हंस भी उसी वृक्ष पर आकर रहने लगा. चूंकि दोनौ एक ही वृक्ष पर रह रहे थे. इसलिए दोनौ में गहरी मित्रता हो गई. हंस को अपने मित्र कौए पर बडा भरोसा believe था कि वह कभी भी धोखा नहीं देगा.

  तभी एक दिन शिकार करने एक शिकारी उस जंगल में आया और दोपहर को उसी पेड के नीचे विश्राम करने लगा. जिस पर हंस और कौआ रहते थे. शिकारी थका हुआ था. इसलिए वह उस पेड के निचे लेट गया और उसे गहरी नींद लग गई.  तभी थोडी देर बाद कौए ने बीट कर दी. जो शिकारी पर जा गिरी जिससे उसके कपडे खराब हो गए. कौआ बहुत धुर्त और चालाक था.

उसे पता था कि जब शिकारी उठेगा और बिट देखेगा. तो गुस्से में मुझे मार डालेगा.  उसने यह बात हंस को नहीं बताई और चुपचाप दूसरे पेड पर जाकर बैठ गया. थोडी देर बाद शिकारी कि नींद खूली तब उसने देखा की किसी पक्षी ने उस पर बिट कर दी है. इससे उसे बडा गुस्सा आया.  उसने ऊपर कि और देखा तो वहा पर एक हंस बैठा हुआ था. शिकारी ने सोचा कि इसी दुष्ट हंस ने मुझ पर बीट कि होगी. और वह गुस्से मे आकर अपना धनुष-बाण उठाकर हंस पर तीर चला दिया.

तीर लगते ही हंस बेचारा जमीन पर आ गिरा और कुछ देर तड़प-तड़प कर उसने अपने प्राण त्याग दिए. हंस ने कोई अपराध नहीं किया था. फिर भी वह क्यौं मारा गया ?  ऐसा उसकी बुरी संगती के कारण हुआ है. उसने कोए जैसे धुर्त और चालाक प्राणी से मित्रता की और उस पर अंधा विश्वास किया. बुरे मित्रो की धुर्तता का परिणाम हमेशा उनके नादान मित्रौ को हि भुगतना पडता है. अर्थात हमे बिना सोचे समझे मित्रता मै इतना गहरा नहीं जाना चाहिये.  धन्यवाद दोस्तों | 

Sunday, May 23, 2021

एक चाय की प्याली जिसने जिंदगी बदल डाली


अवश्य पढें आपकी आँखें छलक जायेंगी   *मानवता व इंसानियत किसी की बपौती नहीं है* 


वासु भाई और वीणा बेन गुजरात के एक शहर में रहते हैं। आज दोनों यात्रा की तैयारी कर रहे थे। 3 दिन का अवकाश था वे पेशे से चिकित्सक थे ।लंबा अवकाश नहीं ले सकते थे ।परंतु जब भी दो-तीन दिन का अवकाश मिलता ,छोटी यात्रा पर कहीं चले जाते हैं ।

       आज उनका इंदौर - उज्जैन जाने का विचार था । दोनों साथ-साथ मेडिकल कॉलेज में पढ़ते थे, वहीं पर प्रेम अंकुरित हुआ ,और बढ़ते - बढ़ते वृक्ष बना। दोनों ने परिवार की स्वीकृति से विवाह किया  । 2 साल हो गए ,संतान कोई थी नहीं ,इसलिए यात्रा का आनंद लेते रहते थे ।

      विवाह के बाद दोनों ने अपना निजी अस्पताल खोलने का फैसला किया , बैंक से लोन लिया ।वीणा  बेन स्त्री रोग विशेषज्ञ और वासु भाई  डाक्टर  आफ मेडिसिन थे ।इसलिए दोनों की कुशलता के कारण अस्पताल अच्छा चल निकला था ।

     आज इंदौर जाने का कार्यक्रम बनाया था । जब  मेडिकल कॉलेज में पढ़ते थे वासु भाई ने  इंदौर के बारे में बहुत सुना था । नई नई  वस्तु है। खाने के शौकीन थे । इंदौर के सराफा बाजार और 56 दुकान  पर मिलने वाली मिठाईयां नमकीन के बारे में भी सुना था, साथ ही  महाकाल के दर्शन करने की इच्छा थी इसलिए उन्होंने इस बार  इंदौर उज्जैन  की यात्रा करने का  विचार किया था ।

     यात्रा पर रवाना हुए ,आकाश में बादल घुमड़ रहे थे । मध्य प्रदेश की सीमा लगभग 200 किलोमीटर दूर थी। बारिश होने लगी थी।म.प्र.  सीमा से  40 किलोमीटर पहले छोटा शहर  पार  करने में समय लगा। कीचड़ और भारी यातायात में बड़ी कठिनाई से दोनों ने रास्ता पार किया।


भोजन तो मध्यप्रदेश में जाकर करने का विचार था । परंतु चाय का समय हो गया था ।उस छोटे शहर से चार 5 किलोमीटर आगे निकले ।सड़क के किनारे एक छोटा सा मकान दिखाई दिया ।जिसके आगे वेफर्स के पैकेट लटक रहे थे ।उन्होंने विचार किया कि यह कोई होटल है । वासु भाई ने वहां पर गाड़ी रोकी,  दुकान पर गए , कोई नहीं था ।आवाज लगाई , अंदर से एक महिला  निकल कर के आई। 

उसने पूछा क्या चाहिए ,भाई  ?


           वासु  भाई ने दो पैकेट वेफर्स  के लिए ,और कहा  बेन   दो कप चाय बना देना ।थोड़ी जल्दी बना देना , हमको दूर जाना है  । पैकेट लेकर के गाड़ी में गए ।वीणा  बेन और दोनों ने पैकेट के वैफर्स  का नाश्ता किया ।चाय अभी तक  आई नहीं थी । दोनों कार से निकल कर के दुकान में रखी हुई कुर्सियों पर बैठे ।वासु भाई ने फिर आवाज लगाई ।

थोड़ी देर में वह महिला अंदर से आई ।बोली -भाई बाड़े में तुलसी लेने गई थी , तुलसी के पत्ते लेने में देर हो गई ,अब चाय बन रही है ।थोड़ी देर बाद एक प्लेट में दो मैले से कप ले  करके वह गरमा गरम चाय लाई। 

      मैले कप को देखकर वासु भाई एकदम से  अपसेट  हो गए ,और कुछ बोलना चाहते थे ।परंतु वीणाबेन ने हाथ पकड़कर उनको रोक दिया  ।               चाय के कप उठाए  ।उसमें से अदरक और तुलसी की सुगंध निकल रही थी ।दोनों ने चाय का एक  सिप  लिया  । ऐसी स्वादिष्ट और सुगंधित चाय जीवन में पहली बार उन्होंने पी ।उनके मन की  हिचकिचाहट दूर हो गई।

उन्होंने महिला को चाय पीने के बाद पूछा कितने पैसे ?

महिला ने कहा - बीस रुपये 

वासु भाई ने सौ का नोट दिया ।

          महिला ने कहा कि भाई छुट्टा नहीं है । ₹. 20 छुट्टा दे दो  ।वासुभाई ने बीस रु  का नोट दिया। महिला ने सौ का नोट वापस किया। 

वासु भाई ने  कहा कि हमने तो वैफर्स  के पैकेट भी लिए हैं !

           महिला बोली यह पैसे  उसी के हैं ।चाय के पैसे नहीं लिए ।

अरे चाय के पैसे क्यों  नहीं लिए ?

जवाब मिला ,हम चाय नहीं बेंचते हैं।  यह होटल नहीं है  ।

-फिर आपने चाय क्यों बना दी ?

- अतिथि आए ,आपने चाय मांगी ,हमारे पास दूध भी नहीं था । यह बच्चे के लिए दूध रखा था ,परंतु आपको मना कैसे करते ।इसलिए इसके दूध की चाय बना दी ।

-अभी बच्चे को क्या पिलाओगे ?

-एक दिन दूध नहीं पिएगा तो मर नहीं जाएगा । इसके पापा बीमार हैं  वह  शहर जा  करके दूध ले आते ,पर उनको कल से बुखार है ।आज अगर ठीक  हो  जाएगे तो कल सुबह जाकर दूध  ले आएंगे। 

      वासु भाई  उसकी बात सुनकर  सन्न  रह गये। इस महिला ने होटल ना होते हुए भी अपने बच्चे के दूध से चाय बना दी और वह भी  केवल इसलिए कि मैंने कहा था ,अतिथि रूप में आकर के  ।

 संस्कार और सभ्यता में महिला मुझसे बहुत आगे हैं ।

        उन्होंने कहा कि हम दोनों डॉक्टर हैं ,आपके पति कहां हैं बताएं ।महिला उनको  भीतर ले गई  । अंदर गरीबी  पसरी  हुई थी ।एक खटिया पर सज्जन सोए हुए थे । बहुत दुबले पतले थे ।

वासु  भाई ने जाकर उनका मस्तक संभाला ।माथा  और हाथ गर्म हो रहे थे ,और कांप  रहे थे  वासु  भाई वापस गाड़ी में , गए दवाई का अपना बैग लेकर के आए । उनको दो-तीन टेबलेट निकालकर के दी , खिलाई  ।

फिर कहा- कि इन गोलियों से इनका रोग ठीक नहीं होगा ।

        मैं पीछे शहर में जा कर के और इंजेक्शन और इनके लिए बोतल ले आता हूं ।वीणा बेन को उन्होंने मरीज के पास बैठने का कहा ।

 गाड़ी लेकर के गए ,आधे घंटे में शहर से बोतल ,इंजेक्शन ,ले कर के आए और साथ में दूध की थैलीयां  भी लेकरआये। 

             मरीज को इंजेक्शन लगाया, बोतल चढ़ाई ,और जब तक बोतल लगी दोनों वहीं ही बैठे रहे ।

एक बार और तुलसी और अदरक की चाय बनी ।

दोनों ने  चाय पी और उसकी तारीफ की। 

जब मरीज 2 घंटे में थोड़े ठीक हुए,  तब वह दोनों  वहां से आगे बढ़े। 

    3 दिन इंदौर उज्जैन में रहकर , जब लौटे तो उनके बच्चे के लिए बहुत सारे खिलौने ,और दूध की थैली लेकर के आए ।

    1 वापस उस दुकान के सामने रुके ,महिला को आवाज लगाई , तो  दोनों  बाहर निकल कर  उनको देख कर बहुत  खुश  हो गये। 

उन्होंने कहा कि आप की दवाई से दूसरे दिन  ही बिल्कुल स्वस्थ हो गया ।

वासु भाई ने बच्चे को खिलोने दिए  ।दूध के पैकेट दिए  । फिर से चाय बनी, बातचीत हुई ,अपनापन स्थापित हुआ। वासु भाई ने अपना एड्रेस कार्ड  दिया  ।कहा, जब भी आओ जरूर मिले ,और दोनों वहां से अपने शहर की ओर ,लौट गये ।

     शहर पहुंचकर वासु भाई  ने उस महिला  की बात याद रखी। फिर  एक फैसला लिया। 

       अपने अस्पताल में रिसेप्शन पर बैठे हुए व्यक्ति से कहा कि ,अब आगे से आप जो भी मरीज आयें, केवल उसका नाम लिखेंगे ,फीस नहीं लेंगे ।फीस मैं खुद लूंगा। और जब मरीज आते तो  अगर वह गरीब मरीज होते तो उन्होंने उनसे फीस  लेना बंद कर दिया ।

केवल संपन्न मरीज  देखते  तो ही उनसे फीस लेते ।

      धीरे धीरे शहर में उनकी प्रसिद्धि फैल गई  ।  दूसरे डाक्टरों ने सुना  ।उन्हें लगा कि इस कारण से हमारी प्रैक्टिस कम हो जाएगी ,और लोग हमारी निंदा करेंगे । उन्होंने एसोसिएशन के अध्यक्ष से कहा  ।

 एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ वासु भाई से मिलने आए ,उन्होंने कहा कि आप ऐसा क्यों कर रहे हो ?

     तब वासु भाई ने  जो जवाब दिया उसको सुनकर उनका मन भी उद्वेलित हो गया ।

वासु भाई ने कहा कि मैं मेरे जीवन में हर परीक्षा में मेरिट में पहली पोजीशन पर आता रहा ।एमबीबीएस में भी ,एमडी में भी गोल्ड मेडलिस्ट बना ,परंतु सभ्यता संस्कार और अतिथि सेवा में वह गांव की महिला जो बहुत गरीब है ,वह मुझसे आगे निकल गयी। तो मैं अब पीछे कैसे रहूं? 

इसलिए मैं अतिथि सेवा में मानव सेवा में भी गोल्ड मेडलिस्ट बनूंगा । इसलिए मैंने यह सेवा प्रारंभ की । और मैं यह कहता हूं कि हमारा व्यवसाय मानव सेवा का है। सारे चिकित्सकों से भी मेरी अपील है कि वह सेवा भावना से काम करें ।गरीबों की निशुल्क सेवा करें ,उपचार करें ।यह व्यवसाय धन कमाने का नहीं ।

परमात्मा ने मानव सेवा का अवसर प्रदान किया है ,

     एसोसिएशन के अध्यक्ष ने वासु भाई को प्रणाम किया और धन्यवाद देकर उन्होंने कहा कि मैं भी आगे से ऐसी ही भावना रखकर के चिकित्सकीय  सेवा करुंगा।



Friday, May 21, 2021

किसी भी व्यक्ति का बाहरी सौंदर्य नही बल्कि योग्यता काम आती है।


 एक बारहसिंगा झील में पानी पीने पहूंचा। वह जल में अपनी परछाई को देखकर बहुत खुश हुआ और कहने लगा- ओह! भगवान ने मेरा शरीर कितना सुन्दर बनाया है।  सिर तो मानो साचे मे ही डाल दिया है। उस पर लंबे-ंलबे फैले हुए सिंग कितने मनोहर जान पडते है। भला ईष्वर ने इतने प्यारे व मजबुूत सिंग किस पशु को दियेे है।  यह कहते-कहते बाहरसिंगा की नज़र अपने पैरों पर पडी वह दुखी हो उठा और कहने लगा किन्तु यह पैर कितने पतले , सुखे और भददे है। हैं भगवान मैंने तुम्हारा क्या बिगाडा था जो तुमने यह कुरूप पैर देकर मेरी सारी सुंदरता मिट्टी में मिलादी। 

तभी अचानक उसे शिकारी कुत्तो का स्वर सुनाई दिया। अपने जिन कुरूप् पैरों को देखकर वह कुड रहा था, उन्हीं के सहारे वह इतनी तेजी से भागा कि शिकारी कुत्तों की पकड से बहुत आगे निकल गया।  लेकिन उसी समय बाहरसिंगा के लंबे सिंग एक पेड की डालियों में फस गये उसने बहुत जोर लगाया किन्तु सिंग नही निकल पाये।

इतने में शिकारी कुत्ते आ गये और उस पर टुट पडे। बारह सिंगा की आंखे खुल गई उसने मरते-मरते कहा- मेरी समझ में आ गया कि मेरे जो पैर लम्बे, पतले सुखे और भद्दे थे वे ही मेरे प्राण बचा सकते थे।  लेकिन सींग मेरे प्राणों की रक्षा नही कर पाए यदि मैंनें पहले ही जान लिया होता कि वास्तव में सुन्दर तो वह हैं जो हमारे काम आता हैं,

तो आज मुझें अपने प्राण न गवाने पडते ।  कथा का संकेत यह हैं कि किसी भी व्यक्ति या वस्तु का मूलयांकन सुरत के आधार पर नही सिरत के आधार पर करना चाहिए। प्रतिकुल अवसर पर बाहरी सौंदर्य नही बल्कि योग्यता काम आती है। धन्यवाद दोस्तों |

Tuesday, May 18, 2021

आचार्य जीवतराम भगवानदास (जे.बी) क़ि यात्रा


 आचार्य जीवतराम भगवानदास (जे.बी) कृपलानी गांधीवादी नेता थे | एक बार की बार है जब वह रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे | जिस डिब्बे में वह बैठे थे उसी डिब्बे में एक दंपत्ति भी बैठा था, लेकिन वे आचार्य कृपलानी को नहीं जानते थे, वे उनसे अनभिज्ञ थे | उन्होंने आचार्य जीवतराम (कृपलानी) से पूछा, ‘आपकी जाती क्या है ?’  उनकी जिज्ञासा को शांत करते हूए

आचार्य कृपलानी बोले, मेरी एक जाती हो तो बताऊँ | मेरी तो कई जातियां है | इस पर पति-पत्नी असमंजस में पड़ गए और उन्होंने पूछा, ‘ इसका का क्या मतलब हुआ ?’ कृपलानी बोले, ‘अधिकतर जब में जूते साफ़ करता हूँ तो चर्मकार हो जाता हूँ |  जब में मेरे कपड़ों की धुलाई करता हूँ तो कपडे धोने वाला (धोभी) बन जाता हूँ | जब में कॉलेज में अध्यापन के लिए जाता हूँ तो ब्राह्मण हो जाता हूँ, और जब तनख्वाह का हिसाब लगाने बैठता हूँ तब वाणिक बन जाता हूँ

. अब आप ही बताए मेरी कौन सी जाती हुई ?’ कृपलानी के जवाब को सुनकर वह पति-पत्नी निरुत्तर ही नहीं हुई बलि शर्म भी महसूस करने लगे |  हम एक ही जीवन में, एक ही दिन में कार्य तो अनेक करते हैं लेकिन जाती एक बताते हैं | कृपलानी जी ने बिलकुल सही उत्तर दिया | हमें भी इस बात पर थोड़ा सोचना चाहिए | जो स्वांस ब्राह्मण लेता है वही स्वांस एक चमार भी लेता है,

अगर परमात्मा की नज़रों में हम सब के लिए कोई भेद होता तो वह भी तो हम सब के लिए तरह-तरह के इंतजाम कर सकता था | लेकिन उसने तो सभी को एक ही नज़रों से देखा हमने ही सभी को जातियों में बदल दिया |  इंसानो को तो छोड़ो हमने तो भगवानो पर भी लेबल लगा रखें है की ये ऐसे भगवान है, या वैसे भगवान हैं | हमारी दृष्टि ही ऐसी है हम हर चीज को भिन्न-भिन्न करके देखते हैं |

जब की ईश्वर ने हम सबको एक भाव से बनाया है उसका प्रेम सबके लिए समान हैं | हमें भी सभी लोगों को एक दृष्टि से देखना चाहिए | अब जब भी आप कही दो-लोगों को जातिवाद के ऊपर बात करते देखे तो उनको यह कहानी जरूर सुनाइएगा | — धन्यवाद दोस्तों |

Saturday, May 15, 2021

इंसान को अपनी कीमत नहीं गंवानी चाहिए

 

इंसान की कीमत एकबार एक टीचर क्लास में पढ़ा रहे थे| बच्चों को कुछ नया सिखाने के लिए टीचर ने जेब से 100 रुपये का एक नोट निकाला| अब बच्चों की तरफ वह नोट दिखाकर कहा – क्या आप लोग बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?  सभी बच्चों ने कहा – “100 रुपये का”  टीचर – इस नोट को कौन कौन लेना चाहेगा ? सभी बच्चों ने हाथ खड़ा कर दिया

|  अब उस टीचर ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया| अब टीचर ने फिर से बच्चों को नोट दिखाकर कहा कि अब यह नोट कुचल सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा ?  सभी बच्चों ने फिर हाथ उठा दिया।  अब उस टीचर ने उस नोट को जमीन पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचला|

फिर टीचर ने नोट उठाकर फिर से बच्चों को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा ?  सभी बच्चों ने फिर से हाथ उठा दिया|  अब टीचर ने कहा कि बच्चों आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पढ़ाया है| ये 100 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया लेकिन इसकी कीमत 100 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया लेकिन फिर भी इसकी कीमत 100 रुपये ही रही| 

 ठीक वैसे ही इंसान की जो कीमत है और  इंसान की जो काबिलियत है वो हमेशा वही रहती है| आपके ऊपर चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएँ, चाहें जितनी मुसीबतों की धूल आपके ऊपर गिरे लेकिन आपको अपनी कीमत नहीं गंवानी है| आप कल भी बेहतर थे और आज भी बेहतर हैं|

Sunday, May 9, 2021

पुत्र के लिए एक सीख


 एक बार एक पुत्र अपने बूढ़े पिता को साथ लेकर रेस्टोरेंट में भोजन करने के लिए गया। उसके पिता काफी बूढ़े तथा असमर्थ थे, अतः खाते समय वो कुछ भोजन अपने कपड़ों में भी गिरा रहे थे। रेस्टोरेंट में बैठे दूसरे लोग उन्हें घृणा से देख रहे थे परन्तु वह पुत्र शांत था।

जब वह खाना खा चुके तो वह पुत्र जो कि बिल्कुल भी शर्मिंदा नहीं प्रतीत हो रहा था, अपने पिता को धीरे से हाथ-मुंह धोने के लिए ले गया । वहां उसने अपने पिता के कपड़ों में गिरा खाना साफ़ किया और उनके बाल और चश्मे को सही किया । जब वो बाहर आये तो लोग उन्हें ही देख रहे थे और सोच रहे थे कि कैसे कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से खुद को ऐसे शर्मिंदा कर सकता है ।

उस पुत्र ने लोगों कि अनदेखी करते हुए अपने बिल का भुगतान किया और वहां से जाने लगा ।


तभी रेस्टोरेंट में बैठे एक वृद्ध व्यक्ति ने उस पुत्र को आवाज़ लगाई - "हे पुत्र, तुम यहाँ कुछ छोड़ कर जा रहे हो"।

उस पुत्र ने जवाब दिया - "नहीं दादा, मैंने तो कुछ भी नहीं छोड़ा"।

तब उस वृद्ध व्यक्ति ने बोला - "बेटा, तुम आज यहाँ हर पुत्र के लिए एक सीख और हर पिता के लिए एक आशा कि किरण छोड़ कर जा रहे हो" ।

Saturday, May 8, 2021

इंसान का नज़रिया


 एक़ आदमीं मैले में गुब्बारे बेंच क़र अपना गुज़ारा करता था | उस आदमीं के पास लाल, पिले, निले, हरे औऱ भी कई रंगों के गुब्बारे थे | जब उसकि बिक्री क़म होने लगति तो वह हिलियम गैस से भरा एक़ गुब्बारा हवा में उड़ा देता |

बच्चें जब उस उडते गुब्बारे को देखतें, तो वैसा हि गुब्बारा पाने के लिए आतुर हो उठतें |   वे उसके पास गुब्बारे ख़रीदने के लिये पहूंच जाते, औऱ उस आदमी की बिक्री फ़िर बढने लगती | उस आदमीं कि बिक्री जब भी घटती, वह उसे बढाने के लिये गुब्बारे उड़ाने का यह तरीक़ा अपनाता | एक़ दिन गुब्बारे वाले को महसुस हुआ कि क़ोई उसके जेकेट को खींच रहा है तो उसने पलट क़र देखा तो वहाँ एक़ बच्चा खडा था

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बच्चे ने उससे पुछा, “अग़र आप हवा में किसी काले रंग के गुब्बारे को छोड़ें, तो क़्या वह भी उडेगा ?” बच्चे के इस सवाल ने गुब्बारे वाले के मन को छू लिया | बच्चे की और मुड़ कर उसनेँ ज़वाब दीया, “बेटा, गुब्बारा अपने रंग क़ि वज़ह से नहीं, बल्कि उसके अन्दर भरि चीज की वज़ह से उड़ता है |”  हमारे जीवन में भी यहीं ऊसूल लागूँ होता हैं अहम् चिज हमारी अंदरूनी शख्सीयत है | हमारी अंदरूनी शख्सियत से हमारा जो नजरीया बनता है, वहीँ हमेँ ऊपर उठाता है | हार्वर्ड विश्व-विद्यालय के विलियम्स जेम्स का कहना है, हमारी पिढी की सबसें बडी खोज़ यह है क़ि इंसान अपना नज़रिया बदलकर अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकता है |

Thursday, May 6, 2021

पछतावा


 एक बहुत ही मेहनती और ईमानदार लड़का था , जो की बहुत ही ज्यादा गरीब था | वह दिन रात यही सोचता था की वह खूब मेहनत से पढ़ाई करेगा और एक अच्छी सी नौकरी लेकर अपनी एक कार खरीदेगा |
वह जब भी रास्ते में कोई कार देकता तो वह सपनो में खो जाता और सोचने लगता की मुझको को अपनी कार नसीब होगी | उसने ग्रेजुएशन करने के बाद एक नौकरी करनी स्टार्ट कर दिया , कुछ दिन बाद उसकी शादी हो गयी


और कुछ टाइम के बाद उसका एक बेटा भी पैदा हो गया | लेकिन अभी तक वह एक कार नहीं खरीद पाया था , वह कुछ न कुछ पैसे जरूर जमा करता और एक दिन जब उसको लगा की वह अपनी कार खरीद लेगा तो उसने अपने सारे पैसे से एक कार ले लिया |

एक दिन वह अपने कार को खूब रगड़ – रगड़ के धो रहा था तभी उसका बेटा आया और उसने उस पर कुछ पत्थर से लिख दिया |

उसने जैसे ही देखा की वह कुछ लिख रहा था वह उसको पीटने लगा और उसको ले जाकर कमरे में छोड़ दिया | वापस आकर फिर से वह अपने कार को धोना सुरु कर दिया , फिर वह उस जगह पहुंच गया जहा उसका बेटा कुछ लिख रहा था | फिर उसने देखा की उसका बेटा पत्थर से क्या लिखा था | उसके बेटे ने पत्थर से लिखा था I LOVE YOU PAPA , यह देख कर वह रोने लगा और बहुत ही ज्यादा पछतावा करने लगा | वह कमरे में अपने बेटे के पास गया और उसको गले से लगाया और बोला – I LOVE YOU 2 BETA  .

दोस्तों इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलती है की गुस्से में लिया गया निर्णय कभी सही नहीं होता है | इसलिए हम ऐसा कुछ काम न करे की जिसका पछतावा हमको बाद में हो |

Wednesday, May 5, 2021

जिंदगी में मेहनत करते रहो


हर काम अपने समय पर ही होता है एकबार एक व्यक्ति भगवान् के दर्शन करने पर्वतों पर गया| जब पर्वत के शिखर पर पहुंचा तो उसे भगवान् के दर्शन हुए| वह व्यक्ति बड़ा खुश हुआ|  उसने भगवान से कहा – भगवान् लाखों साल आपके लिए कितने के बराबर हैं ? 

भगवान ने कहा – केवल 1 मिनट के बराबर  फिर व्यक्ति ने कहा – भगवान् लाखों रुपये आपके लिए कितने के बराबर हैं ?  भगवान ने कहा – केवल 1 रुपये के बराबर  तो व्यक्ति ने कहा – तो भगवान क्या मुझे 1 रुपया दे सकते हैं ?  भगवान् मुस्कुरा के बोले – 1 मिनट रुको वत्स….हा हा  मित्रों, समय से पहले और नसीब से ज्यादा ना कभी किसी को मिला है और ना ही मिलेगा| हर काम अपने वक्त पर ही होता है| वक्त आने पर ही बीज से पौधा अंकुरित होता है, वक्त के साथ ही पेड़ बड़ा होता है, वक्त आने पर ही पेड़ पर फल लगेगा| तो दोस्तों जिंदगी में मेहनत करते रहो जब वक्त आएगा तो आपको फल जरूर मिलेगा|

जैसा खाओ अन्न,वैसा होवे मन

 *बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा ।*

*सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है , तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।


*एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और एक अच्छे विरक्त साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।*

*और वो साधु बाबा जी भी आ गए बाबा ने बासमती चावल की खीर भी खायी।*

*दोपहर का समय था । सेठ ने कहाः "बाबा जी ! अभी आराम कीजिए । थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा।*

*साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली।*

*सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में रख दी किसी ने पेमेंट की हुई थी वहीं पर रख दी।*


*साधु बाबा आराम करने लगे।*

*खीर थोड़ी हजम हुई । साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ?*

*फिर मन में आया मैं साधु हूं मेरे को क्या जरूरत है इन पैसों की।*

 *लेकिन मन तो मन है ना मन में दोबारा उल्लेख आया एक-दो गड्डी उठा लेता हूं किसको क्या पता चलेगा*।

*साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली।*

*शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।*

*सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो 1 गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली।* 

*सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवतपुरुष थे, वे क्यों लेंगे.?*


 *सेठ थोड़ा कड़क था तो उसने सोचा कि नौकरों की ही करामात है।* 

*नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी।*

*इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः "नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।")*


 
*सेठ ने कहाः "बाबा जी ! आप क्यों लेंगे ? जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा । और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते है।"* 

*साधु "यह दयालुता नहीं है । मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था।*

*साधु ने कहा सेठ ....तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"* 

*सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।*

*साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरीका भाव उत्पन्न कर दिया। सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि* ।

*'हे भगवान .... यह क्या हो गया ?*

*मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी । इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया ।*


*"इसीलिए कहते हैं कि....* 

*जैसा खाओ अन्न ... वैसा होवे मन।* 

*जैसा पीओ पानी....वैसी होवे वाणी।* *जैसी शुद्धी.... वैसी      बुद्धि... ।*   

*जैसे विचार ... वैसा संसार....।*  


*इसलिए हमेशा यह बात ध्यान में रखो नीति मार्ग से कमाया हुआ धन उसी का भोजन करो उसी का दान  करो*।




Monday, May 3, 2021

प्यार का मतलब

 एक दिन आदमी को  उसकी पत्नी ने, जिसके बहोत लम्बे बाल थे उसने उसके लिए एक कंघा खरीदने के लिए कहा ताकि वो अपने बालो की अच्छे से देखभाल कर सके.उस आदमी ने अपनी बीवी से माफ़ी मांगी और कंघी लेने से मना कर दिया. उसने समझाया की उसके पास अभी उसकी टूटी हुई घडी का पट्टा बिठाने के भी पैसे नहीं है. लेकिन फिर भी उसकी पत्नी जिद पर अडी रही.


गुस्से में वह इंसान काम पर जाने के लिए निकाल गया और जाते-जाते अचानक रास्ते में उसकी नजर एक घडी की दुकान पर पड़ी, उसने सोचा की वह उस दूकान पर अपनी घडी बेच देगा और उसकी पत्नी के लिए कंघा लेकर जायेंगा.शाम में वो अपने हातो में कंघी लेकर अपने घर आया, पत्नी को कंघी देने ही लगा

लेकिन अचानक अपने पत्नी को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया, क्यूकी उसने अपनी पत्नी को शोर्ट-हेयर (कम बालो) में देख लिया था.उसने अपने बालो को बेचकर अपने पति की घडी के लिए नया पट्टा ख़रीदा था.

एक दुसरे के प्रति गहरा प्यार देखते हुए अचानक दोनों के आखो से आसू निकलने लगे, ये आसू उनकी ख्वाइश पूरी होने के वजह से नहीं बल्कि उनके एक-दूजे के लिए प्यार को देखकर थे.

सीख :-

प्यार करना मतलब कुछ नहीं है, प्यार करने लायक बनना थोडा बहोत अच्छा है लेकिन प्यार करने और साथ में करने लायक बनना, ये सब कुछ है. प्यार को कभी किसी का दिया हुआ अनुदान समझकर स्वीकार ना करे.

बल्कि जिस से भी हम प्यार करते है, उस से बिना किसी शर्त के, बिना किसी लालच के बिना किसी द्वेषभावना के हमेशा दिल से प्यार करते रहना चाहिये. क्यूकी जब हम किसी को दिल से प्यार करते है तब हम सामने वाले के दिल में हमेशा के लिए बस जाते है. की जब दो लोगो के बिच प्यार होता है तब वह किसी दौलत का भूका नहीं होता, वह भूका होता है तो सिर्फ स्नेहभाव का. जिस से भी हम प्यार करते है उनसे हमेशा हमें प्यार से पेश आना चाहिये. एक दुसरे के लिए समय निकलते रहना चाहिये. तभी हम हमारे रिश्ते को सफलता से आगे बढ़ा पाएंगे.

प्यार से बोला गया आपका एक शब्द दो दिलो के बिच हो रहे बड़े से बड़े मनमुटाव को भी खत्म कर सकता है. प्रेमभाव से रहना कभी-कभी हमारे लिए भी फायदेमंद साबित होता है. क्यू की कई बार जो काम हजारो रुपये नहीं कर पाते वही प्यार से बोले गये हमारे दो शब्द काम आते है.

Saturday, May 1, 2021

हाथी और रस्सी


 एक व्यक्ति रास्ते से गुजर रहा था कि तभी उसने देखा कि एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूंटे से बंधा खड़ा था| व्यक्ति को देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतना विशाल हाथी एक पतली रस्सी के सहारे उस लकड़ी के खूंटे से बंधा हुआ है|

  ये देखकर व्यक्ति को आश्चर्य भी हुआ और हंसी भी आयी| उस व्यक्ति ने हाथी के मालिक से कहा – अरे ये हाथी तो इतना विशाल है फिर इस पतली सी रस्सी और खूंटे से क्यों बंधा है ? ये चाहे तो एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है लेकिन ये फिर भी क्यों बंधा है ?  हाथी के मालिक ने व्यक्ति से कहा कि श्रीमान जब यह हाथी छोटा था मैंने उसी समय इसे रस्सी से बांधा था| उस समय इसने खूंटा उखाड़ने और रस्सी तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन यह छोटा था


 इसलिए नाकाम रहा| इसने हजारों कोशिश कीं लेकिन जब इससे यह रस्सी नहीं टूटी तो हाथी को यह विश्वास हो गया कि यह रस्सी बहुत मजबूत है और यह उसे कभी नहीं तोड़ पायेगा इस तरह हाथी ने रस्सी तोड़ने की कोशिश ही खत्म कर दी|  आज यह हाथी इतना विशाल हो चुका है लेकिन इसके मन में आज भी यही विश्वास बना हुआ है कि यह रस्सी को नहीं तोड़ पायेगा इसलिए यह इसे तोड़ने की कभी कोशिश ही नहीं करता| इसलिए इतना विशाल होकर भी यह हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा है| 


 दोस्तों उस हाथी की तरह ही हम इंसानों में भी कई ऐसे विश्वास बन जाते हैं जिनसे हम कभी पार नहीं पा पाते| एकबार असफल होने के बाद हम ये मान लेते हैं कि अब हम सफल नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते और झूठे विश्वासों में बंधकर हाथी जैसी जिंदगी गुजार देते हैं|

लोग अमीर क्यों नहीं बन पाते हैं ?

 


                 

 अमीर बनना कोई बड़ी बात नहीं हैं और अमीर बनना कोई छोटी बात भी नहीं है ये सब आपकी मेहनत पर निर्भर करता है.  यदि आप दिन रात मेहनत कर रहे हैं, खून पसीना बहा रहे हो तो अच्छी बात है| कौन नहीं चाहता अमीर बनना, कौन नहीं चाहता की उनका नाम हो दुनिया में उन्हें लोग जाने और पहचाने.  लेकिन सबसे बड़ी बात तो ये है की आपके पास समय बहुत कम है और पाना बहुत कुछ हैं| आपको इसके लिए सबसे पहले तो एक काम करना होगा

.  आपको ये बात जांचनी पड़ेगी की आप काम किस प्रकार का कर रहे हो ? यदि आप पूरी मेहनत कर रहे हो और सफलता आपके हाथ नहीं लग रही हो तो आपको ये देखना है की आप के व्यवसाय में भविष्य कितना है, भविष्य में आपके काम की कितनी मांग है.  यदि आपके काम का भविष्य नहीं है तो यकीन मानिये आपके काम को आप द्वारा छोड़ देना ही सही रहेगा|  मैं ये नहीं कह रहा हूँ की आप अपने काम को आज अभी इसी समय छोड़ दो ये बात तो आपको देखनी है समझनी है| जब तक कोई अन्य काम की शुरुआत नहीं होती तब तक आप वही काम करों जिसे आप पहले कर रहे थे. 

 मै आपसे इतना ही कहूंगा की जब ज्यादा जरुरत लगे तभी समझोता करना ठीक रहता है लेकिन हर समय समझोता करने वाला व्यक्ति अपनी जिंदगी को भी समझोते में निकाल देता है.  आप का मन आप का दिल दिमाग सब आपके काम के प्रति होना चाहिए| काम कोई भी हो पुरे मन और दिलों दिमाग से मेहनत से करने वाला व्यक्ति ही सफल रहता है| आपका काम में मन नहीं लगता तो आप अपने काम को छोड़ दोगे.  समय कीमती होता है किसी के लिए ये 24 घंटे भी कम पड़ते है और किसी के लिए ये 24 घंटो का समय भी 1 साल बराबर होता है.

 


मैं ही गरीब क्‍यों? भगवान गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी

क्यों पढ़े - आजकल के दौर में अधिकतर लोग अपने जीवन से असंतुष्ट हैं। उन्हें लगता है कि मैं ही गरीब क्यों। मैं ही दूसरों से कमजोर क्यों हूँ? उन...